डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) से बचने का उपाय
डिजिटल अरेस्ट में साइबर ठग खुद को CBI, NCB, पुलिस या कस्टम अधिकारी बताते हैं। वे वीडियो कॉल (Skype या WhatsApp) के जरिए पीड़ित को डराते हैं कि उनके नाम पर कोई अवैध पार्सल (ड्रग्स, फर्जी पासपोर्ट) पकड़ा गया है या वे किसी मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसे हैं। वे पीड़ित को कैमरे के सामने बैठे रहने और किसी से संपर्क न करने की धमकी देते हैं, जिसे वे 'डिजिटल अरेस्ट' का नाम देते हैं। डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) से बचने का उपाय : इस आलेख में विस्तार से समझाया गया है
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Tej Prakash
2/1/20261 मिनट पढ़ें


आज के दौर में साइबर अपराधी तकनीकी चतुराई से ज्यादा आपके मनोवैज्ञानिक डर का फायदा उठा रहे हैं। इसी डर का सबसे आधुनिक और खतरनाक चेहरा है— 'डिजिटल अरेस्ट' (Digital Arrest)। यह कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साइबर अपराध है, जिसने भारत में हजारों लोगों की मेहनत की कमाई को लूट लिया है।
नीचे इस नए तरह के स्कैम का विस्तृत विश्लेषण, हाल के उदाहरण और इससे बचने के पुख्ता तरीके दिए गए हैं।
'डिजिटल अरेस्ट' (Digital Arrest) क्या है?
डिजिटल अरेस्ट में साइबर ठग खुद को CBI, NCB, पुलिस या कस्टम अधिकारी बताते हैं। वे वीडियो कॉल (Skype या WhatsApp) के जरिए पीड़ित को डराते हैं कि उनके नाम पर कोई अवैध पार्सल (ड्रग्स, फर्जी पासपोर्ट) पकड़ा गया है या वे किसी मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसे हैं। वे पीड़ित को कैमरे के सामने बैठे रहने और किसी से संपर्क न करने की धमकी देते हैं, जिसे वे 'डिजिटल अरेस्ट' का नाम देते हैं।
हाल के खौफनाक मामले (Real-Life Examples: 2025-26)
1. विशाखापत्तनम: बुजुर्ग दंपति से ₹80 लाख की ठगी (जनवरी 2026)
एक 66 वर्षीय महिला को व्हाट्सएप कॉल आया। ठगों ने मुंबई पुलिस बनकर दावा किया कि उनके पति के नाम पर भेजे गए पार्सल में कोकीन मिली है। उन्हें एक हफ्ते तक "डिजिटल निगरानी" में रखा गया और बैंक अकाउंट ऑडिट के नाम पर अलग-अलग खातों में ₹80 लाख ट्रांसफर करवा लिए गए।
2. दिल्ली: बिजनेसवुमन के साथ ₹6.9 करोड़ का फ्रॉड (जनवरी 2026)
साउथ दिल्ली की एक 69 वर्षीय महिला को 9 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया। ठगों ने उसे विश्वास दिलाया कि वह एक अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट का हिस्सा बन गई है। डर के मारे महिला ने तीन बार में ₹6.9 करोड़ ट्रांसफर कर दिए।
3. नोएडा: डॉक्टर से ₹2.8 करोड़ की लूट
हाल ही में एक प्रतिष्ठित डॉक्टर को "डिजिटल अरेस्ट" कर 48 घंटों तक कैमरे के सामने रखा गया। ठगों ने फर्जी सुप्रीम कोर्ट के वारंट दिखाए और जेल जाने का डर दिखाकर करोड़ों रुपये ऐंठ लिए।
ठगों की कार्यप्रणाली (Modus Operandi)
* पहला संपर्क: एक IVR कॉल या मैसेज आएगा— "आपका पार्सल पकड़ा गया है" या "आपका नंबर बंद होने वाला है।"
* अधिकारियों का स्वांग: कॉल को फर्जी पुलिस स्टेशन या ऑफिस में ट्रांसफर किया जाता है, जहां ठग वर्दी पहने हुए और पीछे आधिकारिक लोगो (CBI/ED) लगाए बैठे होते हैं।
* दस्तावेजों का जाल: वे आपको व्हाट्सएप पर फर्जी अरेस्ट वारंट, सुप्रीम कोर्ट के लेटरहेड या सरकारी मुहर वाले दस्तावेज भेजते हैं जो एकदम असली लगते हैं।
* डिजिटल निगरानी: वे आपको किसी भी तीसरे व्यक्ति से बात करने से मना करते हैं (यहाँ तक कि परिवार से भी) और मोबाइल का कैमरा हमेशा ऑन रखने को कहते हैं।
* समाधान के नाम पर वसूली: अंत में, वे मामले को रफा-दफा करने या "वेरिफिकेशन" के नाम पर आपके बैंक बैलेंस को उनके "सरकारी सुरक्षा खाते" (जो असल में उनका खुद का होता है) में भेजने का दबाव डालते हैं।
डिजिटल अरेस्ट से बचने के 'खास टिप्स'
1. रुकें, सोचें और समझें (The Golden Rule)
याद रखें, भारत में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसा कोई कानून नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी (CBI, Police, NCB) कभी भी व्हाट्सएप या स्काइप पर वीडियो कॉल करके किसी को गिरफ्तार नहीं करती और न ही पैसे मांगती है।
2. कॉल तुरंत काटें (Disconnect and Block)
जैसे ही कोई आपसे वीडियो कॉल पर पूछताछ की बात कहे या पार्सल में ड्रग्स होने का डर दिखाए, बिना बहस किए फोन काट दें। बहस करने पर वे आपको मनोवैज्ञानिक रूप से और ज्यादा डरा सकते हैं।
3. 'डिजिटल अरेस्ट' का विरोध करें
यदि कोई आपको कैमरा ऑन रखने को कहता है, तो यह आपकी निजता का उल्लंघन है। किसी भी अजनबी के कहने पर वीडियो कॉल पर न बैठें।
4. दस्तावेजों की जांच करें
ठग जो वारंट भेजते हैं, उनमें अक्सर स्पेलिंग मिस्टेक या गलत लोगो होते हैं। सरकारी एजेंसियां कभी भी व्हाट्सएप पर आधिकारिक नोटिस नहीं भेजतीं।
5. परिवार और दोस्तों को बताएं
साइबर ठगों का सबसे बड़ा हथियार "गोपनीयता" है। वे चाहते हैं कि आप किसी को न बताएं। आप तुरंत अपने परिवार या किसी भरोसेमंद दोस्त को इस कॉल के बारे में जानकारी दें।
यदि आप शिकार हो गए हैं, तो क्या करें?
* 1930 डायल करें: यह भारत सरकार की साइबर क्राइम हेल्पलाइन है। जितनी जल्दी आप रिपोर्ट करेंगे, आपके पैसे फ्रीज होने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी।
* cybercrime.gov.in पर शिकायत: पोर्टल पर सभी सबूत (स्क्रीनशॉट, ट्रांजैक्शन आईडी, फोन नंबर) अपलोड करें।
बैंक को सूचित करें: अपने बैंक को तुरंत कॉल करके खाते को ब्लॉक करवाएं।
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डिजिटल अरेस्ट स्कैम और इससे बचने के उपाय यह वीडियो आपको प्रैक्टिकल तरीके से दिखाता है कि डिजिटल अरेस्ट के दौरान ठग किस तरह का माहौल बनाते हैं और आपको उस समय क्या करना चाहिए।
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