संसद में 'PM CARES' और अन्य फंड्स पर सवाल पूछने पर लगी रोक: PMO ने नियमों का दिया हवाला
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने लोकसभा सचिवालय को सूचित किया है कि 'PM CARES' फंड और दो अन्य प्रमुख फंडों से संबंधित सवाल अब संसद के निचले सदन (लोकसभा) में नहीं पूछे जा सकते
CURRENT AFFAIRS
Tej Prakash
2/11/20261 मिनट पढ़ें


नई दिल्ली: हाल ही में सामने आई एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने लोकसभा सचिवालय को सूचित किया है कि 'PM CARES' फंड और दो अन्य प्रमुख फंडों से संबंधित सवाल अब संसद के निचले सदन (लोकसभा) में नहीं पूछे जा सकते। यह निर्देश 30 जनवरी, 2026 को दिया गया था, जिसने अब एक नई राजनीतिक और कानूनी बहस छेड़ दी है।
किन फंड्स पर लगी रोक?
PMO के निर्देश के अनुसार, निम्नलिखित तीन फंडों से संबंधित कोई भी प्रश्न या मामला लोकसभा में स्वीकार्य नहीं होगा:
* PM CARES Fund:
कोविड-19 महामारी के दौरान आपातकालीन राहत के लिए बनाया गया फंड।
* PMNRF (प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष): आपदा पीड़ितों की मदद के लिए 1948 में स्थापित कोष।
* NDF (राष्ट्रीय रक्षा कोष): सशस्त्र बलों के कर्मियों और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए बनाया गया फंड।
PMO ने किन नियमों का दिया हवाला?
लोकसभा में कामकाज के संचालन (Rules of Procedure and Conduct of Business) से संबंधित दो विशिष्ट नियमों के आधार पर यह रोक लगाई गई है:
* नियम 41(2) (viii):
यह नियम कहता है कि कोई भी प्रश्न ऐसे मामले से संबंधित नहीं होना चाहिए जो प्राथमिक रूप से भारत सरकार की चिंता (Concern) का विषय न हो।
* नियम 41(2) (xvii):
यह नियम उन निकायों या व्यक्तियों के नियंत्रण वाले मामलों पर सवाल उठाने से रोकता है जो प्राथमिक रूप से भारत सरकार के प्रति उत्तरदायी नहीं हैं।
कारण क्या बताया गया?
PMO का तर्क है कि ये तीनों फंड सार्वजनिक स्वैच्छिक योगदान (Voluntary Public Contributions) से बने हैं और इन्हें भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से कोई बजट आवंटित नहीं किया जाता है। चूंकि ये फंड सरकारी राजस्व का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए इन्हें संसदीय जवाबदेही के सीधे दायरे से बाहर रखा गया है।
विपक्ष का विरोध
इस फैसले के बाद विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह कदम लोकतंत्र की पारदर्शिता के खिलाफ है और इससे जनता के प्रतिनिधियों को महत्वपूर्ण वित्तीय मामलों पर जवाबदेही तय करने से रोका जा रहा है।
1. कानूनी स्थिति: ट्रस्ट या सरकारी संस्था?
सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट (Public Charitable Trust): सरकार का तर्क है कि PM CARES और PMNRF संसद के किसी कानून या संविधान द्वारा नहीं बनाए गए हैं। इन्हें 'पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट' के रूप में पंजीकृत किया गया है।
निधि का स्रोत: इन फंड्स में सारा पैसा जनता या संस्थाओं द्वारा स्वैच्छिक दान (Voluntary Contribution) के रूप में आता है। इन्हें भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से कोई बजट नहीं मिलता, इसीलिए सरकार इन्हें "सरकारी फंड" नहीं मानती।
2. RTI (सूचना का अधिकार) और गोपनीयता
RTI को लेकर स्थिति काफी जटिल रही है:
सरकार का पक्ष: सरकार ने अदालतों में हलफनामा दिया है कि PM CARES सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 2(h) के तहत 'पब्लिक अथॉरिटी' (सार्वजनिक प्राधिकरण) नहीं है, इसलिए यह RTI के दायरे से बाहर है।
दिल्ली हाई कोर्ट का ताज़ा रुख (जनवरी 2026):
हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है कि यदि PM CARES को 'राज्य' (State) मान भी लिया जाए, तो भी इसे RTI अधिनियम की धारा 8(1)(j) के तहत 'निजता का अधिकार' (Right to Privacy) प्राप्त है। इसका मतलब है कि तीसरे पक्ष (donors) की जानकारी बिना उनकी सहमति के साझा नहीं की जा सकती।
विपक्ष और कार्यकर्ताओं का तर्क:
आलोचकों का कहना है कि चूँकि इसमें प्रधानमंत्री और वरिष्ठ मंत्री ट्रस्टी हैं, सरकारी ढांचे और राजचिह्न (State Emblem) का उपयोग होता है, इसलिए इसे RTI के दायरे में आना चाहिए।
3. सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसले
सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2020 में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था, जिसने इन फंड्स की कार्यप्रणाली को कानूनी मजबूती दी:
NDRF में फंड ट्रांसफर से इनकार:
कोर्ट ने PM CARES के पैसे को 'राष्ट्रीय आपदा राहत कोष' (NDRF) में ट्रांसफर करने का आदेश देने से मना कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि ये दोनों अलग-अलग उद्देश्यों वाले फंड हैं।
CAG ऑडिट अनिवार्य नहीं:
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि चूँकि PM CARES में सरकारी पैसा नहीं है, इसलिए भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा इसका ऑडिट अनिवार्य नहीं है। इसका ऑडिट निजी चार्टर्ड अकाउंटेंट्स द्वारा किया जाता है।
4. PMNRF और NDF की स्थिति
NDF (राष्ट्रीय रक्षा कोष): यह फंड RTI के दायरे में आता है, लेकिन हालिया PMO निर्देश के बाद अब इस पर भी संसद में सवाल पूछने पर पाबंदी लग गई है क्योंकि यह भी स्वैच्छिक दान पर निर्भर है।
PMNRF:
यह 1948 से एक ट्रस्ट के रूप में चल रहा है और इसकी स्थिति भी PM CARES के समान ही बनी हुई है।
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