न्यूज़ रिपोर्ट: यूजीसी के नए नियम पर महासंग्राम - "समानता" या "अन्याय"?
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा 13 जनवरी 2026 को जारी किए गए नए नियम "Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026" को लेकर देशभर में विवाद छिड़ गया है। जहां एक ओर इसे परिसरों में भेदभाव रोकने का कदम बताया जा रहा है, वहीं सामान्य वर्ग (General Category) के छात्र और कई अधिकारी इसे "एकतरफा" और "खतरनाक" बताकर इसका विरोध कर रहे हैं।
CURRENT AFFAIRS
Tej Prakash
1/26/20261 मिनट पढ़ें


नई दिल्ली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा 13 जनवरी 2026 को जारी किए गए नए नियम "Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026" को लेकर देशभर में विवाद छिड़ गया है। जहां एक ओर इसे परिसरों में भेदभाव रोकने का कदम बताया जा रहा है, वहीं सामान्य वर्ग (General Category) के छात्र और कई अधिकारी इसे "एकतरफा" और "खतरनाक" बताकर इसका विरोध कर रहे हैं।
क्या हैं ये नए नियम?
नए नियमों के अनुसार, भारत के हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी को एक सख्त "एंटी-डिस्क्रीमिनेशन" (Anti-discrimination) ढांचा तैयार करना होगा। ऐसा न करने पर यूजीसी उस संस्थान की फंडिंग रोक सकता है या मान्यता रद्द कर सकता है।
मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं:
24x7 हेल्पलाइन: भेदभाव की शिकायत के लिए चौबीसों घंटे चलने वाली हेल्पलाइन।
इक्विटी स्क्वाड (Equity Squads): कैंपस में घूमने वाले विशेष दस्ते जो "संवेदनशील जगहों" पर नजर रखेंगे ताकि जातिगत टिप्पणी या रैगिंग न हो।
इक्विटी कमेटी: शिकायतों की सुनवाई के लिए एक कमेटी बनेगी जिसका अध्यक्ष संस्थान का प्रमुख होगा। इसमें SC, ST, OBC, महिला और दिव्यांग वर्ग के प्रतिनिधि होना अनिवार्य है।
विरोध क्यों हो रहा है? (सामान्य वर्ग की चिंताएं)
सोशल मीडिया पर #UGCRollback ट्रेंड कर रहा है। विरोध का मुख्य कारण नियमों में किए गए कुछ बदलाव हैं जो वायरल तस्वीरों में भी हाइलाइट किए गए हैं:
झूठी शिकायत पर सजा का प्रावधान हटाया गया: सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि पहले के ड्राफ्ट में झूठी शिकायत करने वाले पर कार्रवाई की बात थी, लेकिन फाइनल नोटिफिकेशन में इसे हटा दिया गया है। छात्रों को डर है कि इसका इस्तेमाल निजी दुश्मनी निकालने के लिए किया जा सकता है।
एकतरफा कमेटी: नियम यह तो कहता है कि कमेटी में आरक्षित वर्गों (SC/ST/OBC) के सदस्य होने चाहिए, लेकिन यह नहीं कहता कि सामान्य वर्ग का प्रतिनिधि होना जरूरी है। इससे छात्रों को डर है कि सुनवाई निष्पक्ष नहीं होगी।
SDM का इस्तीफा: विवाद इतना बढ़ गया है कि उत्तर प्रदेश के एक एसडीएम (जिनका नाम खबरों में अलंकार अग्निहोत्री और वायरल इमेज में रत्नेश कुमार बताया जा रहा है) ने इन नियमों के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इसे "संविधान की मूल भावना के खिलाफ" बताया है।
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